Tuesday, July 11, 2017

छिन्न-भिन्न

न हाल पूछा ... न मिजाज जाना ....
कि -
हम .. अंदर से ... छिन्न-भिन्न हैं ....

ये ... जाने-समझे बगैर .....

उफ़ ... उन्ने .....
लिपट के कहा हमसे .....
कि -

हम ... अंदर-ही-अंदर ....
जल रहे हैं .. भुन रहे हैं ... मर रहे हैं ....
बचा लो हमको ....

अब तुम ही बताओ ...
कि -

इन हालात में ..
हम करते क्या ..... ??
गर न सुनते उनकी .. तो करते क्या ... ???

Saturday, July 8, 2017

बेक़सूर

कुछ गवाहों की शक्ल में थे,
कुछ पुलिस के भेष में थे,
कुछ जज बने बैठे थे,

सब .. हमें ... कातिल ठहराने की जिद में थे ....

रहमत थी ...
करम थे ...
दुआएं थीं ... या कृपा .....

हम .. बेक़सूर थे ...
.... .... .... बेक़सूर निकले ..... ???

Friday, June 9, 2017

उल्लू

जब तक ...
आप उल्लू नहीं बनेंगे
लक्ष्मी आपकी सवारी नहीं करेगी

यहाँ उल्लू बनने से मतलब, उल्लू पक्षी बनने से नहीं है
रीयल लाइफ उल्लू बनने से है

रीयल लाइफ उल्लू बोले तो ?

जिसे हर कोई
उल्लू .. उल्लू .. उल्लू .. पुकार सके
जिसके हाव-भाव उल्लू जैसे हों

जो सिर्फ
उल्लू ही न हो, वरन लोगों को उल्लू बनाने वाला भी हो
प्रदेश को उल्लू बनाने वाला हो, देश को उल्लू बनाने वाला हो !

Monday, June 5, 2017

दस्तूर

जब हम अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ते हैं
तब अंधकार .. हमें ...
रोकने ..
पकड़ने ..
जकड़ने ...
की पूरी कोशिश करता है

वह कभी नहीं चाहता
कि -
हम कभी प्रकाश में जाएँ ... प्रकाश में पहुंचें ....

वजह ... ?
कुछ ख़ास नहीं .. बस वैसी ही है
जैसे ...
बुराईयाँ .. हमें ... अच्छाईयों की ओर बढ़ने नहीं देतीं
शैतानी शक्तियाँ.. हमें दैवीय शक्तियों की ओर बढ़ने नहीं देतीं
बस ... कुछ ऐसा ही दस्तूर है ... कुदरत का

गर .. हमें ...
सदैव ... प्रकाश में ...
अच्छाईयों में ... दैवीय आभा मण्डल में .. रहना है तो
हमें ... सदैव .. सजग रहना होगा
नहीं तो ...
हम .. कभी-भी ...
अंधकार से .. मुक्त नहीं हो पाएंगे ... ???

Thursday, June 1, 2017

सफ़र

बहुत दूर से .. बहुत दूर तक का .. सफ़र है
पाँव के छाले
राह के कंकड़
कोई मायने नहीं रखते,

गर .. ठहरे ...
थके ..
रुके ..
तो समझो गये .. !

क्यों ?
क्योंकि -
वक्त .. और .. मंजिलें ...
कभी .. किसी का .. इंतज़ार नहीं करतीं ... !